Sadulpur(Rajgarh): राजगढ़ ) is a town and tehsil in the Churu district of northern part of Rajasthan state in India. It is also known as Rajgarh. The railway station in Rajgarh is known as Sadulpur. To distinguish Rajgarh from places with similar names, Sadulpur has become a synonym of town’s name in recent times. It is close to the Haryana border. Sadulpur railway junction lies on Bikaner-Churu-Delhi and Churu-Hisar railway routes.Rajgarh or Sadulpur is a town and tahsil in Churu district in Rajasthan. Rajgarh is the birthplace of Lakshmi Niwas Mittal, of Arcelor Mittal and Bimal Jalan, an economist and former Governor of Reserve Bank of India.

Rajgarh is a Municipality city in district of Churu, Rajasthan. The Rajgarh city is divided into 30 wards for which elections are held every 5 years. The Rajgarh Municipality has population of 59,193 of which 30,710 are males while 28,483 are females as per report released by Census India 2011.Population of Children with age of 0-6 is 8122 which is 13.72 % of total population of Rajgarh (M). In Rajgarh Municipality, Female Sex Ratio is of 927 against state average of 928. Moreover Child Sex Ratio in Rajgarh is around 880 compared to Rajasthan state average of 888. Literacy rate of Rajgarh city is 72.72 % higher than state average of 66.11 %. In Rajgarh, Male literacy is around 83.30 % while female literacy rate is 61.41 %.Rajgarh Municipality has total administration over 9,902 houses to which it supplies basic amenities like water and sewerage. It is also authorize to build roads within Municipality limits and impose taxes on properties coming under its jurisdiction.

Sadulpur Named After Maharaja Sadul Singh of Bikaner. It was part of Jangladesh where Ŗathore(Rajput) & Poonia Jats had ruled. The Great fort was built in 1766 by maharja Gaj singh bahadur on name of his son Raj singh ji bahadur of Bikaner. Most of Muslims were migrated from Narhar during construction of Fort.It was supervised by them, they had fought war with local tribes and defeated them. Local tribes were not in favor of construction of fort. Bikaner ruler was very happy with this brave victory.

Out of total population, 18,699 were engaged in work or business activity. Of this 15,286 were males while 3,413 were females. In census survey, worker is defined as person who does business, job, service, and cultivator and labour activity. Of total 18699 working population, 88.96 % were engaged in Main Work while 11.04 % of total workers were engaged in Marginal Work. A large number of skilled & unskilled laborers from Sadulpur are working abroad in places such as Dubai, Muscat, and Saudi Arabia.


Geography Rajgarh is located at28.36°N 75.24°E.[4] Sadulpur railway station has elevation of 239 metres (784 ft).

Climate The region has record temperatures ranging from below freezing point in the winter to over 50° C in summer. The District of Churu is also the hottest zone in the country.

Economy The town has a market (mandi) for commodity trading. Trading of commodity products is always a hot business for the locals in the small town. Sadulpur is also famous for delicious Sweets Common Sweets available here are ceeta, made from milk (Mawa).

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Sadulpur is situated in the midst of the Thar Desert. It is the birthplace of Lakshmi Niwas Mittal, owner of Arcelor Mittal, who is also known as the Steel Man; former Governor Of India, Bimal Jalan and young politician Mr. Vimal Poonia Sarpanch of GP Bewad whose grandfather Mr. Subhash chandra Poonia was an honest & popular Pradhan of panchayat samiti Rajgarh; and well known mathematician Prashant Poonia. Gugoji is a holy place also located in Churu district. Gugoji is known as the god of snakes and is visited throughout the year by people from different parts of the country. Rajgarh is a small town located in Churu district (RAJASTHAN) INDIA. Geographically the place is known as plain of Rajgarh (Rajgarh ka maidan). It is midpoint of delhi and bikaner; It is also the midpoint of jaipur and shriganganagar. Rajgarh has own history,own culture and own reasons to be famous in the world.If we go back we will find the name of initial locality was “LUDI”. Later on the rulers of BIKANER constructed a fort on the border of their state. The fort is called as “GARH” in Rajasthani language. The government is called as “RAJ”. Thus the name of fort was “RAJGARH”. As the primary facility were available in the fort the locality started to settle near the fort. The location was started to known as “RAJGARH” among nearby villages and localities. There is a village near to Rajgarh by the name of LUDI. There is also a locality in RAJGARH known as LUDIBAS. Ludi was a prominent center of education in nearby villages. The school of Ludi was aided by the King of Bikaner.

इतिहासकारों की खोज के अनुसार आज जिस भूमिपर राजगढ़ की बसावट है, वहा पहले लूदी नामक एक बड़ा क़स्बा था | राव बीका के समय लूदी का बड़ा शासक कान्हा पूनिया था | इस क्षेत्र में पूनिया (जाटों की एक उपजाति) के ३०० गांव थे | संभवत: उन गाँवों पर लूदी के शासक का ही शासन था | बड़ी लूदी इस समय राजगढ़ से आठ किलो मी. उत्तर-पूर्व में स्थित है | इस क्षेत्र में मिले मिट्टी के बर्तनों के भाग्नाविशेंशों के आधार पर यहाँ घनी आबादी होने के प्रमाण मिलते है | सन १७६६ में इस पूनिया बाहुल्य क्षेत्र में अजितपूरा के ठाकुर दीपसिंह व छानीके झूर्दा जाटों को दण्डित करके महाराज गजसिंह बड़ी लूदी पाधारे और अपने बड़े राजकुमार राज्सिघं के नाम पर राजगढ़ नाम से गढ़ व बस्ती बसाने के लिए विचार किया | इस के बाद महाराज गजसिंह लूदी से चलकर इस स्थान पर एय और इस स्थान का भली भांति निरिक्षण करके शुभ मुहुर्त में बीकानेर राज्य में तत्कालीन मंत्री व दीवान मेहता बख्तावरसिंह के दयित्त्य में राजगढ़ के गढ़ की नीव रख दी | गढ़ की भूमिपूजा वाले स्थान पर बड़ी लूदी के उपगांव झाजु हूनी की बात भी प्रचलित है | बीकानेर से २१५ की.मी. उत्तर-पूर्व में बीकानेर-दिल्ली रेलवे लाइन पर बसा राजगढ़ आज उत्तर रेलवे का विशाल सादुलपुर जंक्शन है सन १९२० में राजगढ़ की पश्चिमी सीमा पर तत्कालीन बीकानेर महाराज कुमार शार्दुलसिंह के नाम पर राजगढ़ के उपनगर सादुलपुर की स्थापना हुई | आज सादुलपुर उपनगरीय बस्ती राजगढ़ नगरपालिका के अंतर्गत अंकित वार्ड संख्या की तालिका में है | चूंकि राजस्थान में आन्यान्य राजगढ़ नगर होने से राजगढ़ पोस्टऑफिस की पहचान सादुलपुर नाम से रखी गई जिसकी पिन कोड संख्या ३३१०२३ है | इस प्रकार राजगढ़ पोस्टऑफिस की तरह ही रेलवे स्टेशन सादुलपुर जंक्शन के नाम से चिन्हित है | महाराज गजसिंह ने वि.स.१८२३ के अनुसार ईसवी सन १८६६ में राजगढ़ की स्थापना की | महाराज गजसिंह ने इस नगर का नामकरण अपने ज्येष्ठ राजकुमार राजसिंह के नाम पर राजगढ़ रखा सन १९२० मैं तत्कालीन महाराज कुमार शार्दुलसिंह के नाम पर बसने वाला उपनगर सादुलपुर की आबादी को बढ़वा देने के लिए तत्कालीन सर्कार ने अनेक सुविधाएं व रियायतें देने की घोषणा की | सर्व प्रथम श्री हरखचंद सुराना ने अपना आवासीय मकान बनवाया | सादुलपुर उपनगरीय बस्ती की बनावट बहुत सुन्दर है | बाज़ार की सुन्दर व्यवस्था है | बस्ती के बीच में महाराणा प्रताप चौक है | प्रताप चौक में महाराणा प्रताप की भव्यमुर्ती स्थापित है | राजगढ़ को बसे २४५ वर्ष तथा सादुलपुर को बसे ९१ वर्ष हो चुके है |

राजगढ़ ७५:२७ देशांतर और २८.३४ उत्तरी अशंषा आक्षाश पर थार मरुस्थल के उत्तर-पूर्वी किनारे पर स्थित है | आज से लगभग ५०० वर्ष इस क्षेत्र समतल था | किन्तु अब यह क्षेत्र बालुरेत के टीलो (टीबो) के घिराव में है | यहाँ की जलवायु खुश्क है | वर्षा का औसत ५ से १० इंच तक का साईं | पहले यह क्षेत्र बागड़ या जंगल कहलाने के कारण यहां के महाराज जंगलघर बादशाह कहलाते थे | यहां सर्दी में पारा शुन्य से नीचे तक तथा गर्मी में पारा ४८ से ५० तक चला जाता है | यहां श्रावणी तथा साधी दो फसले होती है | यहां पानी की गहराई २०० से ३०० फूट है | यहां का भूगर्भिक जल खारा है | जो पशुओं के पीने लायक कम ही है | यहां पेयजल के परंपरागत जलसंग्रह स्त्रोत “कुंड” रहे है जो अब भी है | यहां का प्रमुख वनस्पति वृक्ष खेजड़ा(जांटी) है | अन्य कंटीला झडिया, वेर तथा आक आदि यत्र-तत्र है | यहां वर्षाकाल में कभी शेखावटी की पहाडियों से कतली नदी का आना बताते है | जो अब विलुप्त प्राय: है | यहां इस क्षेत्र में हिंसक जानवर नहीं है | यहां गर्मी में लूए चलती है | यहां कालीपीली आंधिया और भ्म्बूलो का प्रोकोप रहता है | इस नगर में ऐतिहासिक स्थानों का आभाव है फिर भी इस नगर के प्रमुख स्थानों, संस्थाओ आदि की जानकारी अपेक्षित है |

सुरक्षा की दृष्टि से बनाये जाने वाले गढ़ या किले शासको की शक्ति के केंद्र होते थे | १७६६ ई में राजगढ़ के ऐतिहासिक स्वरूप को बनाये रखने का महतवपूर्ण प्रतिक राजगढ़ का गढ़ एक कुशल इंजिनियर की देख-रेख में निर्मित हुआ था | यह दो मंजिला दुर्ग भी २० फीट ऊँची और ३ फीट चौड़ी विशाल दीवारों से बना है | इसके चारों कोनें पर चार विशाल दुर्ग बने हूये थे | गढ़ की चारदीवारी के बाद चारों और रक्षार्थ बनी खाई २० फीट गहरी तथा १५ फीट चौड़ी बनी हुई थी जो वर्षाकाल में पानी से भर जाती थी, इस गढ़ के दोनों मुख्य द्वार अभी भी सुरक्षित है | इस गढ़ में हाकिम का दीवानखाना, रनिवास, विशाल कुंड, अस्तबल, काराग्रह और कारिन्दो के आवास आदि अभी भी सुरक्षित है | प्रवेश द्वार के सामने वाली दुर्ग के नीचे एक सुरंग सुरक्षित है | जिसमें से घुडसवार तक निकल सकते थे | गढ़ के साथ का परकोटा वर्गाकार था जिसकी प्रतेक मुजा १५०० गज की थी तथा प्रतेयक भुजा में एक-एक दरवाजा था | ये दरवाजे पूर्व में धुनिनाथ मंदिर का दरवाजा, पश्चिम में फतेहपुरिया दरवाजा उत्तर में मर्दा दरवाजा तथा दक्षिण में मोदी दरवाजा के नाम में ख्यातिनाम थे | नगर का पर कोटा और दरवाजा अब नहीं है | वर्त्तमान में गढ़ को नगर श्रेष्ठी श्री सूरजमलजी मोहता ने खरीद लिया है अब वहां नवनिर्मित मोहता पब्लिक स्कूल चल रहा है |

राजगढ़ बस्ती में फतेहपुरिया परिवार द्वारा नवनिर्मित पक्का तालाब था तथा लोहारी – वाला परिवार द्वारा निर्मित पुराना फालसा का कच्चा जोहडा है | किसी समय इन तालाबो का पानी पीने के काम आता था | फतेहपुरिया पक्के तालाब पर अब श्री श्याम सेवा संस्थान द्वारा भव्य श्री श्याम मंदिर का निर्माण करवाया जा रहा है | कच्चा जोहडा अब नगर के नगर के गंदे पानी में परिवर्तित हो गया है | नगर के अनेक मोहल्लों के गंदे नाले इसी पोखर में आकार मिलते है |

वैसे राजगढ़ में अनेक कुएयां रही है किन्तु नगर के पशुधन के पेयजल की व्यवस्था तनसुखरॉय फतेहपुरिया के कुए, नानगराम घेवका के कुए सतनाली वालों के कुए तथा टीकमाणयो के कुए से होती है ये चारों कुए अभी भी चालू हालत में है |

मंदिर एवम धार्मिक स्थलों के मामले में राजगढ़ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | राजगढ़ के ४० से ५० मंदिरों में से करणीमाता का मंदिर, मदनमोहनजी का मंदिर, रामदेवजी का मंदिर, लक्ष्मीनारायणजी का मंदिर, रामबास का श्याम मंदिर, शीतलाजी का मंदिर, गोगाजी का मंदिर, लुहारीवालोका रघुनाथ जी का मंदिर, श्री केशराजी का मंदिर आदि प्रमुख है | अब इस श्रंखला में रानीसती का मंदिर, संचियामाता का मंदिर, विशाल भव्य श्याम मंदिर, गायत्री शक्तिपीठ, तथा जैन धर्म का पार्श्वनाथ मंदिर आदि और जुड़ गए है | राजगढ़ की ईदगाह तथा नर्डिया मोहल्ले की प्रमुख मस्जिद मुसलमान भाइयों की धार्मिक भावना की प्रतीक है | राजगढ़ का प्रारंभिक बाजार आवासीय था | नगर के विकास के साथ ही बाजारों की व्यवस्था अलग से होने लगी | सन १८७४ में राजगढ़ की आबादी मात्र ४००० के लगभग थी, तब राजगढ़ एक परगना था | नगर में केवल ५०० घर थे जबकि राजगढ़ परिक्षेत्र के १५६ गांवों में वह्भग ५५०० घर थे जिनमें ३५६२ कृषक परिवार थे कृषि की बुवाई लगभग २५००० वीघा में होती थी | उस समय क्षेत्रीय गांवों के लिए राजगढ़ का ही एकमात्र बाजार था | राजगढ़ ही व्यापर का प्रधान केंद्र था | बीकानेर स्टेट के राजस्व के ५० प्रतिशत से आधिक की वसूली अकेले राजगढ़ परगने से ही होती थी | बाजार के बीच में टीकमणी परिवार द्वारा निर्मित घंटाघर एवं प्याऊ है | घंटाघर की घडियों की आवाज़ मीलों तक सुनी जाती है | घंटाघर परिसर में ही गणेशजी एक प्राचीन मंदिर है | वर्त्तमान में राजगढ़ के बाजार कई नामों से विभक्त है | यथा-मुख्य घंटाघर बाजार, शीतलाचौक बाजार, दुर्गामार्केट, अशोक मार्केट, स्टेशन रोड मार्केट, सादुलपुर का प्रताप बाजार, बस अड्डे का बाजार,अनाज मंडी मार्केट, औद्योगिक क्षेत्र, मदीना मार्केट, एवं मार्केट आदि व्यापारिक परिसर भी है तथा एक या दो मार्केटिंग काम्प्लेक्स निर्माणाधीन है | राजगढ़ का व्यापार अब अनेक गुणा बढ़ गया है

Sadulpur Sweets Sadulpur is world famous for their quality of Indian sweets. Sitta is a very famous dessert of Sadulpur. All Halwai shops such as Modiji Sweets, Saini Sweets and Bhavna Restaurant are famous for their quality of Sweet

World Class Athletes Sadulpur has given India some athletes which make india proud by winnig gold medals in their field of sports. Krishna Poonia won gold medal in common wealth games 2011 and devendra jhajhria won gold medal in peralampics.

Army Culture Sadulpur is very famous for their participation in Indian army. There is a large number of people are in army and they sacrificed their life for our country.

Communal Harmony Sadulpur is also famous for its communal harmony. Both Hindu and Muslim communities are living here for 100 years with happiness without any communal problems.

Dadrewa Dham Dadrewa is a village situated in Churu district near Sadulpur of Rajasthan, India. The village is situated on the Hissar-Bikaner Highway in between Sadulpur and Taranagar. The famous Gogaji Pir, was born at Dadrewa. Dadrewa is a world famous town

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